शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत ने कहा कि दूसरी पत्नी के पेंशन दावे पर फैसला केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि विवाह पहली पत्नी के जीवित रहते हुआ था। मामले की परिस्थितियों, पहली पत्नी की स्थिति और पेंशन पर किसी अन्य आश्रित के अधिकार को भी देखना जरूरी है।
क्या था मामला?
मामला एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी दूसरी पत्नी की ओर से दायर पेंशन याचिका से जुड़ा था। महिला ने कर्मचारी के साथ वर्ष 1987 में विवाह किया था। उस समय कर्मचारी की पहली पत्नी जीवित थी।
बाद में पहली पत्नी की वर्ष 2015 में मृत्यु हो गई। रिपोर्ट के अनुसार पहली पत्नी की कोई संतान या अन्य वारिस नहीं था। कर्मचारी की मृत्यु वर्ष 2021 में हुई। इसके बाद दूसरी पत्नी ने पारिवारिक पेंशन के लिए दावा किया।
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सरकार ने क्यों रोका पेंशन का दावा?
सरकारी विभाग ने दूसरी पत्नी के दावे को यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि विवाह उस समय हुआ था जब कर्मचारी की पहली पत्नी जीवित थी। विभाग का मानना था कि ऐसी स्थिति में दूसरे विवाह को वैध वैवाहिक संबंध नहीं माना जा सकता।
इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि पहली पत्नी कर्मचारी की मृत्यु से पहले ही गुजर चुकी थी और उसके पीछे कोई अन्य पेंशन दावेदार नहीं था।
अदालत ने यह भी माना कि लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहने की परिस्थितियां भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। कोर्ट के अनुसार, जब दूसरी पत्नी को पेंशन देने से किसी अन्य पात्र व्यक्ति के अधिकार प्रभावित नहीं हो रहे हों, तो केवल तकनीकी आधार पर उसे लाभ से वंचित करना उचित नहीं होगा।
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पेंशन को लेकर क्या दिया आदेश?
हाईकोर्ट ने विभाग को महिला को पारिवारिक पेंशन जारी करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट के मुताबिक नियमित पेंशन मई 2026 से देने और पुराने बकाये का भुगतान तीन महीने के भीतर करने को कहा गया। देरी होने की स्थिति में बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भी निर्देश दिया गया।
हर मामले में दूसरी पत्नी को पेंशन नहीं
यह समझना जरूरी है कि इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि पहली पत्नी के रहते हुए विवाह करने वाली हर दूसरी पत्नी स्वतः पारिवारिक पेंशन की हकदार हो जाएगी।
पारिवारिक पेंशन का अधिकार मामले के तथ्यों, लागू पेंशन नियमों, व्यक्तिगत कानून और अन्य पात्र आश्रितों की स्थिति पर निर्भर कर सकता है। हिमाचल हाईकोर्ट के पुराने फैसलों में भी कहा गया है कि दूसरी पत्नी का दावा कुछ परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किया जा सकता।