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हिमाचल में 83 दवाओं के सैंपल फेल, देशभर में 239 दवाओं पर ड्रग अलर्ट; वापस होगा स्टॉक

हिमाचल में 83 दवाओं के सैंपल फेल, देशभर में 239 दवाओं पर ड्रग अलर्ट; वापस होगा स्टॉक
हिमाचल में 83 दवाओं के सैंपल फेल, देशभर में 239 दवाओं पर ड्रग अलर्ट; वापस होगा स्टॉक
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शिमला: हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। जुलाई के ड्रग अलर्ट में देशभर में 239 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश में तैयार की गई 83 दवाएं भी शामिल बताई जा रही हैं। गुणवत्ता जांच में फेल हुए संबंधित बैचों को बाजार से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

दवाओं की गुणवत्ता की नियमित जांच केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य की औषधि नियंत्रण एजेंसियों की ओर से की जाती है। CDSCO की ड्रग अलर्ट व्यवस्था में मानकों पर खरे नहीं उतरने वाली दवाओं को NSQ यानी Not of Standard Quality के रूप में चिन्हित किया जाता है।

हिमाचल की 83 दवाएं जांच में फेल

रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में जारी ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश में निर्मित 83 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए। ये दवाएं राज्य के अलग-अलग फार्मा यूनिटों में तैयार की गई थीं।

हिमाचल देश के प्रमुख दवा उत्पादन केंद्रों में शामिल है। खासकर सोलन, सिरमौर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फार्मा कंपनियां काम करती हैं। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता पर होने वाली हर जांच राज्य के फार्मा सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण होती है।

देशभर में 239 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे

जानकारी के मुताबिक, हिमाचल की 83 दवाओं समेत देशभर में कुल 239 दवा सैंपल गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए हैं।

यहां यह समझना जरूरी है कि किसी दवा का सैंपल NSQ घोषित होना और दवा का नकली या मिलावटी होना एक ही बात नहीं है। NSQ का मतलब है कि जांच के दौरान संबंधित सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों में से किसी मानक पर खरा नहीं उतरा।

किन कारणों से फेल होते हैं दवा के सैंपल?

दवाओं की जांच में कई अलग-अलग गुणवत्ता मानकों को देखा जाता है। इनमें दवा में मौजूद सक्रिय तत्व की मात्रा, उसकी पहचान, घुलने की क्षमता, स्टेरिलिटी और अन्य तकनीकी मानक शामिल हो सकते हैं।

अगर कोई सैंपल निर्धारित मानक पूरा नहीं करता है तो नियामक एजेंसियां संबंधित निर्माता से जवाब मांग सकती हैं और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

प्रभावित दवाओं का स्टॉक वापस लेने की प्रक्रिया

गुणवत्ता जांच में फेल दवाओं को लेकर संबंधित कंपनियों को कार्रवाई करनी होती है। केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, NSQ घोषित दवाओं के मामलों में CDSCO निर्माताओं को संबंधित दवाओं को बाजार से वापस लेने के निर्देश देता है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जाती है।

इसलिए जिन बैचों को ड्रग अलर्ट में चिन्हित किया गया है, उनके स्टॉक को बाजार से हटाने और वापस मंगाने की प्रक्रिया की जाएगी।

मरीज और दवा खरीदने वाले क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति के पास ड्रग अलर्ट में शामिल दवा का संबंधित बैच मौजूद है, तो उसे बिना जानकारी के इस्तेमाल जारी रखने के बजाय डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

सिर्फ किसी दवा के एक सैंपल के NSQ पाए जाने के आधार पर हर पैक को खराब मानना सही नहीं है। दवा का नाम, कंपनी और बैच नंबर जांचना जरूरी होता है।

हिमाचल के फार्मा उद्योग के लिए क्यों अहम है मामला?

हिमाचल में दवा निर्माण का बड़ा औद्योगिक आधार है। पहले भी राज्य में निर्मित दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल होने के मामले सामने आते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर मई 2026 के ड्रग अलर्ट में हिमाचल में बनी 43 दवाओं के सैंपल फेल होने की रिपोर्ट सामने आई थी।

ऐसे मामलों में कंपनियों की जिम्मेदारी के साथ-साथ नियामक एजेंसियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दवाओं की गुणवत्ता सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी होती है।

क्या है NSQ?

NSQ यानी Not of Standard Quality का मतलब है कि जांच किया गया दवा सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर पाया। इसका कारण दवा की गुणवत्ता से जुड़ा कोई तकनीकी पैरामीटर हो सकता है।

यह शब्द अपने आप में यह साबित नहीं करता कि दवा नकली है। नकली, मिलावटी और NSQ दवाओं की कानूनी और तकनीकी श्रेणियां अलग हो सकती हैं।

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Pankaj Koundal

Pankaj Koundal

Staff Writer — AV24 News

Hi, I’m Pankaj Kaundal — a Digital Marketer and Content Creator with over 5 years of hands-on experience. I help brands stand out online through smart strategy, creative content, and performance-driven marketing. I believe great content builds trust, and smart marketing drives growth.Pankaj Koundal

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