नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या 1,100 के पार पहुंच गई है, जबकि नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में करीब 4,500 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, बुधवार सुबह जारी अपडेट में मृतकों की संख्या 1,114 दर्ज की गई, जबकि चीन की ओर से तिब्बत में 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
राहत और बचाव अभियान एक सप्ताह बाद भी जारी है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक नेपाल में करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन दूरदराज के इलाकों में मलबे और कीचड़ में दबे शवों और लापता लोगों की तलाश अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कब और कैसे आई यह आपदा
नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त 2026 की सुबह हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने से यह आपदा शुरू हुई। इससे बना पानी, मिट्टी और चट्टानों का विशाल सैलाब त्रिशूली नदी के करीब 72 किलोमीटर लंबे हिस्से में बसे दर्जनों गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले गया। बाढ़ की चपेट में चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यीरोंग चेकपॉइंट भी पूरी तरह तबाह हो गया। सैलाब इतना शक्तिशाली था कि कुछ शव करीब 240 किलोमीटर दूर भारत की सीमा तक बहकर पहुंच गए।
आपदा से पहले ग्लेशियर में अस्थिरता के संकेत मौजूद थे। बुधवार को सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन से पहले ही ग्लेशियर में दरारों और बदलाव के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे थे।
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूर
बचाव अभियान के लिए सबसे बड़ी चुनौती केंद्रीय नेपाल की हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों में फंसे मजदूरों तक पहुंचना है। मलबे से भरी इन सुरंगों में सैकड़ों कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है, और बचाव दलों ने मलबा हटाने के लिए नियंत्रित विस्फोट तक का सहारा लिया है।
चितवन जिले में सामूहिक दफन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, क्योंकि क्षत-विक्षत और अज्ञात शवों की पहचान मुश्किल हो रही है। शवगृहों में जगह और रेफ्रिजरेशन की कमी के चलते नेपाल सरकार ने पड़ोसी देशों से फॉरेंसिक और डीएनए जांच में विशेष सहयोग मांगा है।
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विदेशी नागरिक भी लापता सूची में
लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, कनाडा, दक्षिण कोरिया और लातविया के नागरिक शामिल हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई श्रद्धालु भी शामिल हैं, जो हादसे के वक्त ग्यीरोंग पोर्ट पर मौजूद थे।
राहत कार्य और अंतरराष्ट्रीय मदद
नेपाल सरकार ने खोज एवं बचाव अभियान में बड़ी संख्या में सेना और पुलिस बल तैनात किए हैं। हेलीकॉप्टर लगातार दूरदराज के इलाकों से घायलों और फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। भारत और चीन ने भी सुरंग बचाव और आपदा प्रबंधन में विशेषज्ञ टीमें भेजी हैं, जबकि अमेरिका ने नेपाल को मानवीय सहायता के तौर पर लाखों डॉलर की मदद देने की घोषणा की है।
स्रोत: नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA), CNN, ABC News, Reuters, Wikipedia (2026 Nepal floods) पर आधारित रिपोर्टिंग को संकलित कर तैयार किया गया।